बेरोजगारी-युवा पर भारी / श्वेता दूहन देशवाल

बेरोजगार है,रोजगार चाहिए
भटक रहा दर-दर युवा
देश की उन्नति में
इसका हाथ होना चाहिए
पढ़े लिखे हैं युवा देश के
फिर क्यों बेरोजगारी का साँप
देश को डस रहा
क्यों कर रहे आत्मदाह युवा
बूढ़ा बाप शव को कन्धा दे रहा
क्या आलम है
अब तक जहाँ खुशियाँ खेलती थीं
उस आंगन में चूल्हा तक न जल रहा
घोट रहे गला अपने सपनों का युवा
दाग दामन पर लग रहा
ले रहा समय परीक्षा
हालात से युवा हताश हो रहा
अगर रोकना है बेरोजगारी की दीमक को
थाम उम्मीद का दामन
कदम आगे बढ़ाना होगा
दे व्यवसायिक शिक्षा युवा को
स्वरोजगार को बढ़ाना होगा।


©श्वेता दूहन देशवाल

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